Tuesday, 30 March 2010

राजस्थांन दिवस

राजस्थांन दिवस मनावण री मन मांय उमक जागी, अेक’र पाछौ टटोळ्यौ जकौ पोसाळां मांय बांच्यौ हौ. राजस्थांन कंया बण्यौ अर इणरौ इतिहास कांई हौ.

सब देख’र लागौ कै फक्त इणरौ नांव इज राजस्थान पड़‌यौ छै, राजस्थान मांय रेवणीयौ राजस्थानी कुहावै पण वौ ई फक्त नांव रौ राजस्थांनी, उणनै उणरी भासा अर संस्क्रती सूं हेत राखण रौ हक ईं नीं दियौ भारत सरकार.

सरदार पटेल राजपुतानै रै सगळा राजावां नै लाळा-लुंभा करनै अर वांनै वांरी अर वांरै रईयत (प्रजा) री भलाई बताय’र भारत मांय विलय वास्तै राजी कर दिया. इणरै साथै ईं अठा री संस्क्रती, अठा री सभ्यता, रीति रिवाज सैं कीं खतम कर दियौ. भारत मांय विलय रै साथै ईं आपां आपणी हजारूं बरसां री परंपरा, भासा अर संस्क्रती रौ राष्ट्रीय अेकता अर अखंडता रै नांव पर समर्पण कर दियौ.

राजस्थांनी भारत मांय सबसूं विशाळ भाग मांय बोली जावण वाळी भासा छै. आ भासा आखै राजस्थांन, मध्य प्रदेश रै माळवै, उत्तर गुजरात, पाकिस्तान रै सिंध, थारपारकर अर पंजाब रा घणकरा इलाकां, हरियाणा अर इणरी अेक बोली गुजरी तौ कश्मिर, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चेकोस्लाविया अर सोवियत रुस रा घणकरा देसां मांय बोलीजे.

भारत सरकार राजपुतानै नै राजस्थांन नांव तौ दे दियौ, पण राजस्थांन रा प्राण अठा री भासा नै मानता नीं दी. राजस्थांन री सगळी बोलियां सूं मिळ’र जै भासा बणै वा अेक राजस्थांनी नै इण री बोलीयां रै हिसाब सूं तोड दी अर इणनै हिंदी भासा री अेक बोली बताय दि.

भारत सरकार नै औ डर ई सतावै कै जिण हिंदी भासा नै राष्ट्रभासा बणावण रौ वा सुपणां देखै छै, अर बोलै छै कै आ भासा दुनीया री तीजी सबसूं ज्यादा बोली जावण वाळी भासा छै. राजस्थानी भासा नै मान्यता मिळ जावै तौ इण भारत सरकार री आ बात झुठी हु जावै, क्युं कै राजस्थांनी अेक स्वतंत्र भासा रै रुप मांय भारत री सबसूं ज्यादा बोली जावण वाळी भासा छै.

राजस्थान रै भारत मांय विलय सूं राजस्थांन नै अेक हिसाब सूं गुलामी इज हाथ लागी है. भारत मांय रेवता राजस्थांनीयां नै आपरी भासा वापरवा रौ इधकार कोनीं, जिणसूं वांनै वांरै राज्य मांय भासा रै आधार पर मिलण वाळा सगळा हकां सूं हाथ धोवणा पडे छै. राजथांनीयां नै वांरै खुद रै राज्य मांय नौकरी नीं मिळै. दूजा राज्यां रा हिंदी भासी आय’र अठै नौकरी करै अर आपणा राजस्थांनी भाई प्रदेसा कांनी न्हावै.

दूजी कांनी पोसाळां मांय शिक्षा हिंदी भासा मांय हुवण सूं टाबरां नै भणाई मांय तकलिफ आवै. टाबर डाफाचुक व्है जावै कै, घरै तौ वौ दूजी भासा बोलै अर पोसाळां मांय दूजी भासा छै. वौ खुद री भासा नै हिनता री निजर सूं देखण लागै. अेड़ौ टाबर ना तौ हिंदी बराबर सिखै ना ई राजस्थांनी रौ ग्यान हुवै. सेवट ૪-૫ पास करनै वौ पोसाळां (स्कुलां) छोड’र प्रदेशां कांनी मुंडो करै.

राजस्थांन रै भारत मांय विलय सूं अठा रै मानखां नै बेरोजगारी मिळी, लोगां नै आपणी भासा-संस्क्रती रै प्रती हिन भावना मिळी. पछै बतावौ कैड़ौ राजस्थांन दिवस. हकिकत मांय तौ ૩૦ मार्च नै राजस्थांन वासियां नै काळा दिन रै रुप मांय मनावणौ चाईजै. लोग केह्‌वै इण दिन राजपुतानै री सगळी रियासतां आपस रौ बैर भुलाय’र अेक हूगी, ना आ बात नीं है, राजस्थान सूं पैली जद राजपुतानौ हौ उण समै अेकता अबार रै राजस्थान करता वधारै ही, हर रियासत री राजभासा राजस्थानी ही. लोगां रै कन्नै रुजगार हौ अर आपसरी मांय घणौ भाईपौ हौ.

रहसी राजस्थान, राजस्थानी राखिया ।

7 comments:

Arun Taparia said...

khamma ghani
bilkul sahi likhyo ho sa. aaj u.p bihar ra minakh rajasthan me sarkari naukri kare aur rajasthan ra minakh ya to khali ghume ya choti moti private naukri kar riya hai. mahare hisab su to rajasthan me sarkari naukri me rajasthaniya to aarakshan (quota) fix karno chahiye kam su kam 50%.

PRITHVI said...

खम्मा घणी..
बात तो थे घंणी चोखी कई है.. इं सारु काफी काम करयो जाणो बाकी छे !

किरण राजपुरोहित नितिला said...

घणो सही फरमायो सा!
राजस्थानी भासा घणी पुराणी भासा है।आ खुदरै इतहास में कई ठा कितरी विपदावां झेल र इ खुदरो अस्तित्व कायम राखती आई है । भले वै शिलालेख व्है,साहित या आम बोलचाल अर व्योपार । इणरी खिमता इनै अजूं इ नीची नी पड़न देती, हिन्दी जैड़ी नुवी नानकी भासा इणरो कई नी बिगाड़ सकती ही पण राजस्थानी नै राजस्थानियां री कमतरी री भावना इणनै ले डूबी । बाड़ कई खुद खेत इ फसल खायगो तो किणनै दोख देवां??
देस री घणी भासावां लुप्त होवण मातै आयोड़ी है पण भासा नै लेय र हीणता फकत राजस्थानियां में है। अठै तक की आपांरै आकती पाकती आ लुपत हूती जाय री है।
इणरो गमियोड़ो मान सम्मान पाछौ लावण सारु कानून रे सोटा री दरकार है जिको सगळा हीनां नै पाछा जीवण दान दै।
ओ सोटो आरक्षण हू सकै।

Anonymous said...

har state me apni boli re vaste ladai hove for ex. RAJ THAKREY
wo shai hai

Hari Taparia said...

घणी खम्मा हनवंत बन्ना सा,
या बात तो १००% खरी है, पण इ बीमारी (हिंदी भाषा) रो इलाज कई है, आपा हर बार केवल बीमारी रि बात करा हा, पण इके इलाज के बारे मे कोई चर्चा कोणी हुवे, अगर हुवे भी तो लागु कोणी, इको जिमेद्दर कुन?? की आपा ने आपनी ही मायड़ भाषा ने बचवान रि वास्ते यो सब करनो पड़े, "आज तो फिर भी गनीमत है, काल काई होवे ला, काई आपा आपणी ही मायड़ भाषा रो मान बचा पावला?"

vinod saraswat said...

राजस्थान में दिली रा दल्ला राज करे.. अठे री धन-संपदा ने लूंट ने दिली में हाजर कर दे. राजस्थानी भाषा रे बिना इण राजस्थान रो कोई मतलब कोनी. अठे री सरकार राजस्थानी भाषा संस्कृति ने रिग्दोलन रो काम कर रही है.. समूचे भारत रा गोधा इण चरनोई में चर रिया है. आपा री आ मुर्खता देखो के आपा जय जय राजस्थान ने जय जय भारत कर रिया हाँ. असल में तो आपा इण भारत देश रे उपनिवेश में जी रिया हाँ.. बंद करो इण भारत रा गुण गावणा. ओ भारत गुण-गाळ है. ने इण रा दला आपा पर हुकुम चलावे. इण सरकारा रा हुका-पाणी बंद करना पडसी.. जद अमेरिका में राना रा लोग गहलोत रा पूर फाद्य जद ओ राजस्थान री विधान सभा सू प्रस्ताव पारित करायो.. अबे इण रे साथे हरेक ठोड इस्सी करो तो ओ आपरे हाकमा रे आगे आपारी बात ने राखसी. इण सरकार ने देवन वाला सगळा टैक्स बंद करदो.. भारत सरकार अर राजस्थान सरकार रे मंत्रिया रो हरेक ठोड विरोध करो. लाते ले ने राजपथ पर निकल आवो. ऊत रो गुरु जूट व्हे. अर ओ रोल्तंत्र ने दिली रा डाला आ ही भाषा समझे.. तो क्यू नी अबे आपा इनी भाषा में बात करा. इण गहलोत री नकटाई देखो इण राजस्थानी भाषा साहित्य संस्कृति अकादमी ने पांगली बना ने राख्दी. अठे नी तो अध्यक्ष है नी कार्य समिति, सामान्य सभा. अकादमी री मासिक पत्रिका जागती जोत लारले डेड बरस सू नी छपे. फेर ओ गहलोत क्यारी धन धन करावनी चावे. धित्कार है. इण ने ......... .

शंकर सिंह राजपुरोहित said...

sagla ne mahari taraf su jai rajasthan ....
aapne marwad ri bhasha ar sanskarti ne mitavan re waste e bahar ra bandra aayoda hai......e bandra jathe j reve bathe hindi nam ro kachro felave hai .....
aa hi ni hai e bahar su schoola ra mastar ban r aave ar balka ne schoola me hindi bolani anivary kar re rakhe hai citiya me hindi sivay to tabra ne pato e ni hai ki aapne marvad ri bhasha mayad hai ......pan mahari 1 gujarish hai sagla ne ki bahar walo bheya ro balan balo ane khud mayad ne sawaro ......
Hindi ri hewai chodo....bhasha mayad bolo re..........