Thursday, 29 October 2009

घोड़ळिये री करी वीणती, मिळ्यो बछेरियो


अेक जाट अळगै गांव पाळौ जावतौ हौ। आसोजां रौ तावड़ौ हो। च्यारूंमेर जांणै झाळां दाझै। लांबी भांय। जाट परसेवा में घांण व्हैगौ। उणरी फींचा तूटण लागी। पण जोर कांईं करै। पैंडौ तौ हालियां ही कटै। धमेक बिसाई खावण सारू वौ खेजड़ी री छींयां में लातरनै हेटै बैठो। ऊभी आंगळियां करनै रामसापीर नै वीणती करी—रामसा पीर, थूं घट—घट रौ वासी है, दुखां रौ मेटणहार है, पछै म्हारै मन री पीड़ा थारा सूं छांनी क्यूं? जे अबार भगत री पीड़ा जांणनै अेक घोड़लियौ भेजदै तौ थारा जलम—जलम गुण गावूं।

सताजोग री बात के ज्यूं ईं आंख्यां मींचनै वीणती करी के उणनै आवाज सुणीजी—औ कुण बैठौ है? जाट जांणियौ के रामदेवजी सांप्रत परगटिया है। वौ आंख्यां मींच्यां थकां ईं बोल्यौ—औ तौ म्हैं आपरौ भगत हाजरियौ जाट हूं। पाछी आवाज आई—अठै क्यंू बैठौ? जाट जाणियौ के आज तौ रामदेव बाबौ तूठौ ही तूठौ। हाथ जोडऩै कह्यौ—बाबा, एक घोड़लिया री खातर बैठौ हूं। लांबौ गांवतरौ है। अबै म्हारा सूं अेक पावंडौ ई धकै नीं चालीजै। थांरै तबेला में अलेखूं घोड़ा है। देदै रामसा—पीर, अेक थाकोड़ौ ई टारड़ौ देदै।

आ कैयनै जाट आंख्या खोली तो देखै के साम्ही घोड़ी री लगाम पकडिय़ां अेक असवार उभौ। घोड़ी रै अड़ौअड़ एक नैन्हौ सीक बछेरियौ निगै आयौ। घोड़ी रौ असवार जाट नै रौब सूं कह्यौ—घोड़ी मारग में ठांठ दै दियौ। म्हनै दिन बंधियां पैली गांव पूगणौ जरूरी है। चाल फुरतरी कर। इण बछेरिया नै खांधा माथै उखण लै। बछेरियौ कंवळौ है, इणरा पग सावळ जमे कोनी। मोटियार काठी है, लै अबै मोड़ौ मत कर। इण बछेरिया नै माथै उखण अर घोड़ी रै साथै —साथै चाल।

जाट जाणियौ, आ तौ जबरी व्ही। म्हैं तौ चढ़ण सारू गीत गाया, आ वीणती तौ सांम्ही मूंघी पड़ी। कह्यौ—बापजी एक चिलम पीवूं जितै थोड़ा सुस्तावौ। जाट आपरी कडिय़ां सूं बंधी पावोरी खोलनै जरदौ काढिय़ौ। चिलम भरनै सिळगाई। असवार घणौ आंचौ करियौ तौ वौ पांच सातेक फूंका खाचनै ऊभौ व्हियौ। घोड़ी रा बछेरिया नै पूठ माथै उखणियौ अर घोड़ी रै साथै—साथै वहीर हुवौ। मन में विचार करतौ जावतौ के रामसा पीर हेलौ सुणियौ पण सांभळियौ कौनीं। म्हैं तौ म्हारे बैठण सारू घोड़ौ मांगियौ हौ पण बाबौ म्हारै ऊंचावण सारू बछेरियौ भेज दियौ। वीणती भरै तौ पड़ी पण आराम री ठौड़ दुख देवण नै।